दादी माँ की समस्या


सोनू पांचवी कक्षा में पड़ता था | गर्मियों की चुतियो में वह अपनी दादी की पास रहने गया | गाँव में कई बाग थे आमो के | सोनू को आम खाने बहुत पसंद थे | लेकिन सोनू को सबसे ज्यादा मज़ा आमो के पहरेदारो को बेकूफ बनाने में आता था | बेवकूफ बनाने के बाद वह अपने दोस्तों के साथ आमो के बाग़ में गुस जाते और जम कर आमो का मजा करते |
सोनू की दादी माँ उसकी शेतानियो से बहुत तंग थी | उन्होंने सोनू को समझाने की बहुत कोशिश करती परन्तु वह सुनी अनसुनी कर देता था | गाँव के पास बहुत बड़े ऋषि मुनि रहते थे | उसकी दादी एक दिन उन्ही ऋषि के पास गई और वहा जा कर उन्होंने साडी कहानी ऋषि को सुनाई और ऋषि ने उन्हें अगले दिन आने को कहा | अगले दिन दादी फिर से ऋषि के पास गई परन्तु उस दिन भी ऋषि ने उन्हें अगले दिन आने को कहा | लगभग १० दिनों तक ऐसा ही चलता रहा | दादी को बहुत गुस्सा आ रहा था परन्तु को चुप चाप थी | और दसवे दिन ऋषि ने कहा, “कल अपने पोते को मेरे पास ले कर आना | अब में उससे बात करुगा|” यह सुनते ही दादी को गुस्सा आ गया और बोली महाराज यह बात आप मुझे पहले दिन भी बोल सकते थे | इसकेलिय आपन ने दस दिन ले लिए |
यह सुनते ऋषि मुस्कराकर बोले, “माँ आप बिलकुल ठीक कहा रही था लेकिन जो काम न करने में स्वंय मुझे कठिनाई हो रही हो उस काम को न करने की सलाह में आपके पोते को कैसे दे देता |” दादी यह सुनकर चोंक गई, उसने बहुत चकित हो कर पूछा, “मुनिवर में समझी नहीं” |


ऋषि बोले, “माँ, चकित मत हो, आम मुझे भी बहुत पसद है और इसलिए में उसे खाने से कैसे रोक सकता था? और इसलिए मैंने आप से १० दिन मांगे ताकि में भी आम को छोड़ सकू | और इस १० दिनों में में १ भी आम नहीं खाया | इसलिए मेने आप को कल आने को कहा अपने पोते के साथ |
यह सुनकर दादी माँ लज्जित हो गई | वह मन ही मन सोचने लगी की आम तो उन्हें भी बहुत पसंद है परन्तु उन्होंने कभी भी ऋषि की तरह से नहीं सोचा | जाते जाते उन्होंने ऋषि को प्रणाम किया और वहा से चली गई |
सीख: किसी को भी सीख देने से पहले, अपने आप पर लागु कर ले फिर किसी की दे|

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