गंदा मजाक बाल कहानी

आखिर बच्चों का प्रिय त्यौहार होली आ ही गई ।होलिका दहन हो चुका था। अन्य बच्चों की तरह वृन्दा और नंदा की ऑखों में भी नींदनही थी और वह जल्दी से सुबह होने का इंतजार कर रही थीं ।होली के दिन उनके घर बहुत मेहमान मिलने आते थे और वे सब भी अपने अपने मित्र और रिश्तेदारों के घर शुभ कामनाए देने जाते थे ।मम्मी ने गुजियाँ व कईतरह की मिठाइयां,नमकीन बनाई थीं।साथ ही सौंफ ,इलायची व पान का इंतजाम भी किया था।वृंदा - नंदा दोनो बहनों ने अपनी सहेलियों के लिये विशेष रूप से मीठे पान तैयार किये थे पर सहेलियों को शरारती बहनो की फितरत पता थी और वे स्वंय भी उनकी तरह ही शरारती थीं।...उन्हें लग रहा था कि पान में कुछ गड़बड़ हो सकती है ।इसलिएकिसी ने भी पान नहीं खाया ।बहुत आग्रह पर एक दो ने पान ले तोलिया परमुंह में नहीं रखा ।वह दोनो अपने दोस्तों से जब पान लेने का आग्रह कररही थीं तब उनकी इंगलिश टीचर जो मम्मी की अच्छी मित्र थीं घर आई ।सभी बच्चों ने उन्हें"हैप्पी होली' कहा ।टीचर को पान बहुत पसंद था ।उन्हों ने प्लेट मे से एक पान ले कर मुंह में रख लिया ।बच्चो ने पूछा "टीचर आपको पान पसंद है ?'" हाँ पान मुझे अच्छा लगता है पर मैंने इसको अपनी आदत नहीं बनने दिया है ' कह कर टीचर मम्मी से मिलनेचली गई ।दूसरे दिन पता चला कि टीचर को फूड पोइजनिंग हो गया है,वो अस्पताल में भर्ती हैं।मन ही मन दोनोंबहने डर गई थीं कि टीचर हमारा पान खाकर तो बीमार नहीं हो गई।मम्मी उन्हें देखने अस्पताल गई थीं ।मम्मी ने घर आते ही बताया --"पता नहीं क्योँ तुम्हारी टीचर पूछ रही थीं कि पान आपने किस की दुकान से मंगाया था..पान खाते ही उनका जी मिचलाने लगा था उसकेबाद उनकी तबियत बिगड़ती चली गई थी।क्या तुम दोनों ने कुछ गड़बड़ की थी ?'दोनो कुछ नहीं बोलीं पर उनके झुके सिर इस बात की गवाही दे रहे थे कि उन्हों ने कुछ गलत किया था।"बोलो वृंदा - नंदा तुम लोगों ने पान में कुछ मिलाया था ?'"हाँ मम्मी अपने दोस्तों के लियेहम ने कुछ पानों में चुटकी भर रंग डाला था परहमारे पान अलग प्लेटमें थे । हमने टीचर को दिये भी नहीं थे ...हम से बात करते हुए टीचर ने एक पान उठा कर मुंह में रख लिया ।उन्हेरोकने का हमें मौका ही नही मिला...सॉरी मम्मी ।'"सॉरी मुझे से नहीं अपनी टीचर सेबोलना...मुझे तुम दोनो से ऐसी उम्मीद नहीं थी ।यह तो बड़ा गंदा मजाक है ।तुम्हे अपने दोस्तों के साथ भी ऐसा मजाक नहीं करना चाहिये था ।थोड़ा रंग - गुलाल लगाने तक तो ठीकहै पर खाने की वस्तु में मिलावट....इस से तो किसी की जान भी जा सकती है।'"आगे से हम ऐसी गल्ती फिर कभी नहीं करेंगे ।...प्लीज मम्मी पापा को यह सब मत बताना ।' कह कर दोनो बहने रोने लगी थीं"पापा से कहने न कहने की बात बादमें सोचेंगे... पहले तुम दोनो टीचर के पास जा कर उन से माफी माँग कर आओ ।'"हाँ मम्मी हम आज ही उनके पास जाकर अपनी गल्ती के लिये क्षमा माँगेंगे ।

Comments

Popular posts from this blog

CTET: Central Teacher Eligibility Test - Exam Details, Syllabus, and Result

List of Indian States and Their Capitals