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Showing posts with the label Moral Hindi Story

गुलाम की सीख Hindi Kahani

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दास प्रथा के दिनों में एक मालिक के पास अनेकों गुलाम हुआ करते थे। उन्हीं में से एक था लुक़मान। लुक़मान था तो सिर्फ एक गुलाम लेकिन वह बड़ा ही चतुर और बुद्धिमान था। उसकी ख्याति दूर दराज़ के इलाकों में फैलने लगी थी। एक दिन इस बात की खबर उसके मालिक को लगी, मालिक ने लुक़मान को बुलाया और कहा- सुनते हैं, कि तुम बहुत  बुद्धिमान हो। मैं तुम्हारी बुद्धिमानी की परीक्षा लेना चाहता हूँ। अगर तुम इम्तिहान में पास हो गए तो तुम्हें गुलामी से छुट्टी दे दी जाएगी। अच्छा जाओ, एक मरे हुए बकरे को काटो और उसका जो हिस्सा बढ़िया हो, उसे ले आओ। लुक़मान ने आदेश का पालन किया और मरे हुए बकरे की जीभ लाकर मालिक के सामने रख दी। कारण पूछने पर कि जीभ ही क्यों लाया ! लुक़मान ने कहा- अगर शरीर में जीभ अच्छी हो तो सब कुछ अच्छा-ही-अच्छा होता है। मालिक ने आदेश देते हुए कहा- “अच्छा! इसे उठा ले जाओ और अब बकरे का जो हिस्सा बुरा हो उसे ले आओ।” लुक़मान बाहर गया, लेकिन थोड़ी ही देर में उसने उसी जीभ को लाकर मालिक के सामने फिर रख दिया। फिर से कारण पूछने पर लुक़मान ने कहा- “अगर शरीर में जीभ अच्छी नहीं तो सब बुरा-ह...

दो नुकसान

आते ही कामवाली मनोरमा  बोली ---    "अम्मा सरकार का दिमाग खराब हो गया है क्या ?'' "क्या हुआ मनोरमा, बहुत परेशान दिख रही हो ?'' "अरे अम्मा होना क्या है ?...आप को तो मालुम मेरे दोनो लड़के एक फैक्ट्री में काम करते हैं पर अब मालिक काम से हटाता बोलरा।'' "क्यों ?'' "बोलरा छोटे बच्चों से काम कराना अपराध है।जो लोग ऐसा करेंगे उन को पुलिस पकड़ लेगी,फिर उन्हें सजा भी हो सकती है ।'' "हाँ सरकार बाल मजदूरी के खिलाफ कानून बनाया तो है । उनका कहना है कि कम मजदूरी दे कर बच्चों से बहुत काम लिया जाता हैं और उन्हें अभी पढ़ना चाहिए।'' "ये बात तो ठीक है अम्मा बच्चों से बहुत काम कराते हैं और मजदूरी बड़ो से आधी भी नहीं देते.. उनकी पगार बढ़ाने को कानून बनाये ,काम के घन्टे तय कर दें पर ये तो काम ही नहीं कराना बोल रए.. इस से दो नुकसान हैं अम्मा।'' "कौन से नुकसान हैं ?'' 'एक तो अम्मा बच्चे जो पगार लाते हैं वो बन्द हो जाएगी तो गुजारा कैसे होगा ?दूसरा बिना काम के वो करेंगे क्या ..इधर उधर आवारा घू...

एक रोटी लघु कहानी

तीन व्यक्ति एक सिद्ध गुरु से दीक्षा प्राप्त कर वापस लौट रहे थे . गुरु जी ने उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान के साथ – साथ व्यवहारिक होने की भी सीख दी थी . तीनो तमाम ग्रंथो , पुराणों पर चर...

बिल्ली की कहानी

एक महात्माजी अपने कुछ शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थें, एक दिन कहीं से एक बिल्ली का बच्चा रास्ता भटककर आश्रम में आ गया । महात्माजी ने उस भूखे प्यासे बिल्ली के बच...

कर्म की महानता

कर्म की महानता एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन व...

गुस्सैल

                                                                एक लडका था. उसका नाम था खुश ।नाम तो उसका खुश था जिसका मतलब होता है प्रसन्न  पर वह अपने स्वभाव से बहुत गुस्से वाला था इसिलए सबने उसका नाम गुस्सैल रख दिया था । वह अपने माता पिता की अकेली संतान था उसकी हर माँग एक बार में ही पूरी हो जाती थी   इसीलिए वह जिद्दी भी हो गया था ।वह सातवीं कक्षा में पढ़ता था .वहॉं भी उसका वही हाल था ,रोज उसकी शिकायतें स्कूल से भी आने लगी थीं । वह खेल के मैदान में , क्लास  में हर जगह अपने साथियों से झगड़ा करता और मारपीट पर उतर आता ।उसे ना सुनने की आदत नहीं थी ,वह चाहता था सब उसकी बात माने पर वह किसी की बात सुनना या मानना नहीं चाहता था ।      एक दिन स्कूल से फिर शिकायत आई थी , पापा ने उसको बहुत डॉंटा तो वह गुस्सा  हो कर अपने कमरे में चला गया । मम्मी  जब उसको खाना खान...

चोरी का माल

                                                                                                                                                  अमन पापा के साथ अपनी ज्वैलरी की दुकान पर बैठा था तभी एक दीन हीन सा आदमी आया और दुखी स्वर में बोला साहब मुझे पैसों की बहुत जरूरत है, बीबी दवाखाने में है. पचास हजार रुपए अभी जमा कराने हैं ,लेट होगया तो वह मर जाएगी '  ‘इसमें हम तुम्हारी क्या मदद कर सकते हैं ?’           उसने इधर उधर नजर दौड़ाई और बोला मैं बेचने को पत्नी के ...

कहानियाँ

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भ्रांत धारणा एक व्यक्ति हर रोज तालाब के किनारे घूमने जाता था. पानी में उसकी परछाईदिखाई पड़ती थी. तालाब में बहुत सारीमछलियाँ रहा करती थी. एक मछली ने एक दिन उस व्यक्ति के प्रतिबिम्ब को पानी में देखा तो उसे सर नीचे और पाँव ऊपर नज़र आये. वह हर रोज ऐसा ही देखती थी इसलिए उसने यह दृढ़ धारणा बना ली कि आदमी एक ऐसा प्राणी है जिसका सर नीचे और पाँव ऊपर होते हैं.एक दिन वह मछली पानी की सतह पर आई. आज उसने कुछ और ही देखा. आज उसे आदमीका सर ऊपर और पाँव नीचे दिखाई दिए. मछली ने सोचा कि यह व्यक्ति जरुर शीर्षासन कर रहा है क्योंकि वैसे तो आदमी का सर नीचे और पाँव ऊपर होते हैं. यह उस मछली की भ्रांत धारणा थी. पर यहाँ स्थिति केवल उस मछली की नहीं हम सब की है. सुख और दुःख हकीम लुकमान का बचपन बहुत अभावों में गुजरा था. अपने भरण-पोषण के लिए उन्हें गुलामी भी करनी पड़ी. एक बार उनके मालिक ककड़ी खाना चाहते थे. लुकमान उनके लिए ककड़ी ले आये. मालिकने जैसे ही ककड़ी को चखा उन्हें पता चला कि वह तो बहुत कड़वी है. मालिक नेककड़ी लुकमान को देते हुए कहा, ‘इसे तू खा ले.’लुकमान ने मालिक से ककड़ी ली और बिनामुंह बिचकाए आराम से ...

सफलता का रहस्य

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Key To Success सफलता का रहस्य  एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या  है? सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो.वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया. लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना. सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?” लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना” सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना  चाहते थे  तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

दादी माँ की समस्या

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सोनू पांचवी कक्षा में पड़ता था | गर्मियों की चुतियो में वह अपनी दादी की पास रहने गया | गाँव में कई बाग थे आमो के | सोनू को आम खाने बहुत पसंद थे | लेकिन सोनू को सबसे ज्यादा मज़ा आमो के पहरेदारो को बेकूफ बनाने में आता था | बेवकूफ बनाने के बाद वह अपने दोस्तों के साथ आमो के बाग़ में गुस जाते और जम कर आमो का मजा करते | सोनू की दादी माँ उसकी शेतानियो से बहुत तंग थी | उन्होंने सोनू को समझाने की बहुत कोशिश करती परन्तु वह सुनी अनसुनी कर देता था | गाँव के पास बहुत बड़े ऋषि मुनि रहते थे | उसकी दादी एक दिन उन्ही ऋषि के पास गई और वहा जा कर उन्होंने साडी कहानी ऋषि को सुनाई और ऋषि ने उन्हें अगले दिन आने को कहा | अगले दिन दादी फिर से ऋषि के पास गई परन्तु उस दिन भी ऋषि ने उन्हें अगले दिन आने को कहा | लगभग १० दिनों तक ऐसा ही चलता रहा | दादी को बहुत गुस्सा आ रहा था परन्तु को चुप चाप थी | और दसवे दिन ऋषि ने कहा, “कल अपने पोते को मेरे पास ले कर आना | अब में उससे बात करुगा|” यह सुनते ही दादी को गुस्सा आ गया और बोली महाराज यह बात आप मुझे पहले दिन भी बोल सकते थे | इसकेलिय आपन ने दस दिन ले लिए | यह सुनत...

लालच का फल

एक बार की बात है | भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी एक साथ हस्तिनापुर जा रहे थे | उनके हस्तिनापुर चले जाने के बाद अक्रूर और कृतवर्मा ने शतधन्वा को मणि छिनने के लिए उकसाया | शतधन्वा बड़े दुष्ट और पापी स्वभाव का मनुष्य था | दोनों के बहकाने पर उसने लोभवश सोए हुए सत्राजित को मोत के घाट उतार दिया और उसकी मणि प्राप्त करके वहा से चला गया | अपने पिता की मरने की खबर सुन कर सत्यभामा रोने लगी | तभी उसको भगवान श्रीकृष्ण की याद आई और उसने प्रतिज्ञा ली की जब तक श्रीकृष्ण शतधन्वा का वध नहीं कर देगे तब तक वह अपने पिता का दाह संस्कार नहीं करने देगे | इसके बाद वह हस्तिनापुर गई और वहा जाकर श्रीकृष्ण को साडी बात बताई | भगवान श्रीकृष्ण उसी समय सत्यभामा और बलरामजी के साथ हस्तिनापुर से द्वारिका लोट आए | द्वारिका पहुच कर उन्होंने शतधन्वा को बंदी बनाने का आदेश दे दिया | यह सुन कर की श्रीकृष्ण ने उन्हें बंदी बनाने का आदेश दे दिया है तो वह भयभीत होकर कृतवर्मा और अक्रूर के पास गया और उनसे सहायता की गुहार की | किंतु दोनों ने सहायता से इंकार कर दिया | तब उसने मणि अक्रूर को सोप दी और अश्व पर स्वर हो कर द्वारिका से भ...

Heart Touching story

एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था, एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी. उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा. दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजा खोला, जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उसने पानी का एक गिलास पानी माँगा. लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक बड़ा गिलास दूध का ले आई. लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया. ” कितने पैसे दूं?” लड़के ने पूछा. ” पैसे किस बात के?” लड़की ने जवाव में कहा.” माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए.” ” तो फिर मैं आपको दिल से धन्यबाद देता हूँ.” जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा, उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकी थी बल्कि उसका भगवान् और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था. सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी. लोकल डॉक्टर ने उसे शहर के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया. विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया. जैसे ही उसने लड़की के कस्वे का...