कैसे मिला खोया जहाज


यह कहानी उस वक्त की है जब लोग लम्बी यात्राए अधिकतर समुंद्री जहाजो से करते थे | ऐसा ही एक जहाज एक लड़का जिसका नाम दिनेश था अपने मामा के साथ सफ़र का रहा था | वह जहाज के सभी यात्रियों का चहेता बन गया था क्योकि वह अकेला लड़का था उस जहाज पर | दिनेश सारा दिन उस जहाज के एक कोने से दुसरे कोने में घूमता रहता था |
जहाज को बन्दरगाह से चले अभी १० दिन ही हुए थे की रस्ते में बर्फीली हवाए चलने गई थी | दिन-पर-दिन हवाए तेज होती गई और कुछ ही दिनों में हवाओ ने एक भयंकर तूफान का रूप ले लिया था अब तो तूफान के साथ साथ बारिश भी होने लग गई थी | अब दिनेश सारा दिन अपने ही कमरे में रहता था | खराब मोसम के कारण सभी यात्री धीरे धीरे बीमार पड़ने लग रहे थे और कुछ की तो मोत भी हो गई थी परन्तु न तो तूफान रुका और न ही बारिश रुकी | यात्रियों का मरना रुक नहीं रहा था | जहाज के कप्तान ने सारी कोशिश कर ली परन्तु कही से कुछ मदद नहीं मिल पा रही थी क्योकि जहाज के वायरलेस ख़राब हो चुके थे |
अब जहाज पूरी तरह से सुमुंदर में खो चूका था और आस पास कोई मदद करने के लिए भी कोई नहीं था | ऐसा लग रहा था की अगले २-३ हफ्ते तक ये तूफान रुकने वाला न था | अब तो जहाज पर तेल और खाने पीने की भी कमी होने लगी थी धीरे धीरे देखते जहाज के संही यात्री मर चुके थे | अब अकेला दिनेश ही रह चूका था | तूफान के कारण वो अपने कमरे से बहरा भी नहीं निकल पा रहा था | अब जहाज पर उसके अलावा और कोई न था | और अचानक एक चमत्कार हुआ | मोसम अब सुधर रहा था और समुद्र भी शांत हो चूका था |

भाग्यवश, उसी समय एक अन्य जहाज के कप्तान ने दूरबीन से उस खोए हुआ जहाज को देख लिया था | यह देखकर वह हेरान रह गए की इतने दिनों तक और इतने तूफान और बारिश में यह जहाज बच कैसे गया | यधपि उसे जहाज पर कोई व्यक्ति दिखाई न दिया, फिर भी उसने जहाज के बराबर अपना जहाज लगाकर दिनेश को बचा लिया |

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