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जब नारी है………… तभी तो है ये सृष्टि सारी

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कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी, तो कभी माँ है नारी पुरुष जिसके बिना असहाय है, ऐसी है नारी कभी ममता की फुलवारी, तो कभी राखी की क्यारी है नारी सृष्टि जिसके बिना थम जाए, ऐसी है नारी पुरुषों की पूरी भीड़ पर अकेली भारी है नारी जो सृष्टि को जलाकर राख कर दे, ऐसी चिंगारी है नारी बेटी हो तो…….. पिता की राजदुलारी है नारी माँ हो तो………. सन्तान पर हमेशा भारी है नारी बहन हो तो……. भाई की लाडली है नारी पत्नी हो तो…….. पति की जान है नारी पुरुष हमेशा अधूरा तो…….. हमेशा पूरी है नारी सृष्टि जिस पर घूम रही, वह धुरी है नार जब गर्भ में नहीं मरोगे, तभी तो तुम्हारी है नारी  जब नारी है………… तभी तो है ये सृष्टि सारी

Hindi kavita- हिंदी कविता

माना हालात प्रतिकूल हैं, रास्तों पर बिछे शूल हैं रिश्तों पे जम गई धूल है पर तू खुद अपना अवरोध न बन तू उठ…… खुद अपनी राह बना……………………….. माना सूरज अँधेरे में खो गया है…… पर रात अ...

आखिर क्यों लड़ते हो

Read it..   like it..    share it... ,,( jai) मालूम नही किसने लिखा है, पर क्या खूब लिखा है.. नफरतों का असर देखो, जानवरों का बटंवारा हो गया, गाय हिन्दू हो गयी ; और बकरा मुसलमान हो गया. मंदिरो मे हिंदू देखे, मस्जिदो...

गन्दा तालाब

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फ्रेडी मेंढक एक तालाब के पास से गुजर रहा था , तभी उसे किसी की दर्द भरी आवाज़ सुनाई दी . उसने रुक के देखा तो फ्रैंक नाम का एक मेंढक उदास बैठा हुआ था . ” क्या हुआ , तुम इतने उदास क्यों हो ?” , फ्रेडी ने पुछा . ” देखते नहीं ये तालाब कितना गन्दा है …यहाँ ज़िन्दगी कितनी कठिन है ,” फ्रैंक ने बोलना शुरू किया , “पहले यहाँ इतने सारे कीड़े-मकौड़े हुआ करते थे …पर अब मुश्किल से ही कुछ खाने को मिल पाता है …अब तो भूखों मरने की नौबत आ गयी है .” फ्रेडी बोला , ” मैं करीब के ही एक तालाब में रहता हूँ , वो साफ़  है और वहां बहुत सारे कीड़े -मकौड़े भी मौजूद हैं , आओ तुम भी वहीँ चलो .” ” काश यहाँ पर ही खूब सारे कीड़े होते तो मुझे हिलना नहीं पड़ता .”, ” फ्रैंक मायूस होते हुए बोला . फ्रेडी ने समझाया , “लेकिन अगर तुम वहां चलते हो तो तुम पेट भर के कीड़े खा सकते हो !” ” काश मेरी जीभ इतनी लम्बी होती कि मैं यहीं बैठे -बैठे दूर -दूर तक के कीड़े पकड़ पाता …और मुझे यहाँ से हिलना नहीं पड़ता ..”, फ्रैंक हताश होते हुए बोला . फ्रेडी ने फिर से समझाया , ” ये तो तुम भी जानते हो कि तुम्हारी जीभ कभी इत...

सच्ची मदद

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एक नन्हा परिंदा अपने परिवार-जनों से बिछड़ कर अपने आशियाने से बहुत दूर आ गया था । उस नन्हे परिंदे को अभी उड़ान भरने अच्छे से नहीं आता था… उसने उड़ना सीखना अभी शुरू ही किया था ! उधर नन्हे परिंदे के परिवार वाले बहुत परेशान थे और उसके आने की राह देख रहे थे । इधर नन्हा परिंदा भी समझ नहीं पा रहा था कि वो अपने आशियाने तक कैसे पहुंचे? वह उड़ान भरने की काफी कोशिश कर रहा था पर बार-बार कुछ ऊपर उठ कर गिर जाता। कुछ दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ ये सब दृश्य बड़े गौर से देख रहा था । कुछ देर देखने के बाद वो दोनों परिंदे उस नन्हे परिंदे के करीब आ पहुंचे । नन्हा परिंदा उन्हें देख के पहले घबरा गया फिर उसने सोचा शायद ये उसकी मदद करें और उसे घर तक पहुंचा दें । अनजान परिंदा – क्या हुआ नन्हे परिंदे काफी परेशान हो ? नन्हा परिंदा – मैं रास्ता भटक गया हूँ और मुझे शाम होने से पहले अपने घर लौटना है । मुझे उड़ान भरना अभी अच्छे से नहीं आता । मेरे घर वाले बहुत परेशान हो रहे होंगे । आप मुझे उड़ान भरना सीखा सकते है ? मैं काफी देर से कोशिश कर रहा हूँ पर कामयाबी नहीं म...

एक दौर था

एक दौर था , जब चिट्टी आती थी , तब अपनों की यादें साथ लाती थी , समय बीता , परिवर्तन आया , चिट्टी गयी और फेसबुक ने अपना रंग जमाया , फेसबुक का दौर है , फेसबुक का ज़माना कोईफेस बुक पर फोटो अपलोड करें  तो कोई फेस बुक  का दीवाना 

“एक रोटी ”

एक रोटी ” डाइनिंग टेबल पर खाना देखकर बच्चा भड़का फिर वही सब्जी, रोटी और दाल में तड़का….?मैंने कहा था न कि मैं पिज्जा खाऊंगा रोटी को बिलकुल हाथ नहीं लगाउंगाबच्चे ने थाली उठाई और बाहर गिराई…….? बाहर थे कुत्ता और आदमी दोनों रोटी की तरफ लपके …….? कुत्ता आदमी पर भोंका आदमी ने रोटी में खुद को झोंका और हाथों से दबाया — कुत्ता कुछ भी नहीं समझ पाया उसने भी रोटी के दूसरी तरफ मुहं लगाया दोनों भिड़े जानवरों की तरह लड़े एक तो था ही जानवर, दूसरा भी बन गया था जानवर….. आदमी ज़मीन पर गिर पड़ा, कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा कुत्ता गुर्रा रहा था और अब आदमी कुत्ता है या कुत्ता आदमी है, कुछ भी नहीं समझ आ रहा था नीचे पड़े आदमी का हाथ लहराया, हाथ में एक पत्थर आया कुत्ता कांय-कांय करता भागा…….. आदमी अब जैसे नींद से जागा, हुआ खड़ा, और लड़खड़ाते कदमों से चल पड़ा….. वह कराह रहा था रह-रह कर हाथों से खून टपक रहा था बह-बह कर आदमी एक झोंपड़ी पर पहुंचा……. झोंपड़ी से एक बच्चा बाहर आया और ख़ुशी से चिल्लाया आ जाओ, सब आ जाओ बापू रोटी लाया, देखो बापू रोटी लाया, देखो बापू रोटी लाया……… — !!