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भारत एक कृषि प्रधान देश है

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हम सभी जानते है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है परन्तु आजादी के इतने सालों बाद पहली बार किसी किसान ने देश की राजधनी में अपने आप कों फासी लगा ली . और उसकी मौत हो गयी , और सब देखते रहे ये सब . और राजनीतिज्ञ अपने - अपने भाषण देते रहे .पर क्या अब वह लौट आएगा . आखिर कब तक हम यू ही देखते रहेगे .ये किसान हमें खाने के लिए अन्न देते हैं . हम इंसान हैं हमारे अंदर मानवता होती है जो हमें सीखती है कि हमे एक दूसरे मदद करनी चाहिए . परन्तु ये राजनीतिज्ञ लोग तरह तरह के बिल तो कभी मोसम की तखलीफ़ किसान कों हमेशां ही परेशां करती रहती है .कभी ज़मीन चकबन्दी में रिश्वतखोरी ,कभी उनकी (किसानो) कि बर्बाद फसल का सही मुआवजा नहीं मिलना . ये राजनीतिज्ञ लोग क्यों भूल जाते है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है फिर भी एक किसान कि ये हालत ,शर्म आणि चाहिए . पर हमें क्या किसान रोज मरता है पर हमें क्या ,अखबार पड़ते है ,खाना खाते है ,जो मरते है मरने दो ,पर एसे काम नहीं चलेगा , पहल हमें करने होगी ,मेरा सभी से निवेदन है कि आप अपनी आवाज सरकार तक पहुच्ये . आप सभी अपने अपने सुझाव सरकार तक पहुच्ये ,५० पैसे का पोस्टकार्ड से...

ज़मीन – एक कहानी

ज़मीन – एक कहानी एक गॉव में एक किसान रहता था ! उसका नाम नटखटराम था ! उसका स्वभाव बहुत ही खुश मिजाज़ था. वह हमेशा दूसरों के भले के बारे में सोचता था उसका छोटा सा परिवार था l जिसमें उसके पास दो लड़किया तथा एक लड़का था ,तथा थोड़ी सी उसके पास ज़मीन थी जिससे वह अपने घर का खर्च चलाया करता था धीरे धीरे समय आगे बदलता जाता है और उसके बच्चे बढ़े हो जाते हैं l आज उसकी बढ़ी बेटी कि शादी के लिये रिश्ता आया है सभी घर में बहुत खुश हैं ,सभी के चेरहे पर खुशी है परन्तु नटखटराम का चेहरा आज चिंता में है नटखटराम के चिंता का विषय लड़के के पक्ष से दहेज की माँग है ,परन्तु उसके पास केवल तीन बीघा ज़मीन है ,जिसमें से वह कुछ ज़मीन बेच कर अपनी बढ़ी लड़की कि शादी करेगा कुछ ज़मीन बेच कर छोटी लड़की कि शादी करेगा . धीरे धीरे शादी की तिथि नजदीक आ जाती है आज उसको अपनी ज़मीन बेचनी है ,जिस को वो कभी नहीं बेच न चाहता था l                            शादी की तैयारी चल रही है घर में मंगलमय गीत गाये जा रहे...