भारत एक कृषि प्रधान देश है





हम सभी जानते है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है परन्तु आजादी के इतने सालों बाद पहली बार
किसी किसान ने देश की राजधनी में अपने आप कों फासी लगा ली . और उसकी मौत हो गयी ,
और सब देखते रहे ये सब . और राजनीतिज्ञ अपने - अपने भाषण देते रहे .पर क्या अब वह लौट आएगा .
आखिर कब तक हम यू ही देखते रहेगे .ये किसान हमें खाने के लिए अन्न देते हैं .
हम इंसान हैं हमारे अंदर मानवता होती है जो हमें सीखती है कि हमे एक दूसरे मदद करनी चाहिए .
परन्तु ये राजनीतिज्ञ लोग तरह तरह के बिल तो कभी मोसम की तखलीफ़ किसान कों हमेशां ही परेशां करती रहती है .कभी ज़मीन चकबन्दी में रिश्वतखोरी ,कभी उनकी (किसानो) कि बर्बाद फसल का सही मुआवजा नहीं मिलना .
ये राजनीतिज्ञ लोग क्यों भूल जाते है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है फिर भी एक किसान कि ये हालत ,शर्म आणि चाहिए .

पर हमें क्या किसान रोज मरता है पर हमें क्या ,अखबार पड़ते है ,खाना खाते है ,जो मरते है मरने दो ,पर एसे काम नहीं चलेगा , पहल हमें करने होगी ,मेरा सभी से निवेदन है कि आप अपनी आवाज सरकार तक पहुच्ये .
आप सभी अपने अपने सुझाव सरकार तक पहुच्ये ,५० पैसे का पोस्टकार्ड से दिल्ली सरकार को अपने आस पास के लोंगो की राये तथा अपे विचार सरकार तक जरुर भेजे .



हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिएसि
र्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए  

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