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Inspirational quotes in hindi

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Inspirational quotes in hindi जीवन की सच्ची ख़ुशी उसमें बसी होती है , जो सपनों की उड़ान को नज़रअंदाज़ नहीं करती।   अपनी काबिलियत पर विश्वास रखो , हो सके तो सोच बदलो , ज़िन्दगी की मंज़िलें खुद ही आपको आकार देंगी , बस चलो।   हार मानने से पहले अगर थोड़ा सा प्रयास करो , तो सफलता की खुशबू तो ज़रूर महसूस होगी तुम्हारे क़दमों में।   चाहे रास्ता कितना भी कठिन हो , हक़ीक़त यही है , असली बात तो वही होती है , जिसके लिए तुम दिल से लड़ो।   ज़िंदगी की हर चुनौती में आपका हौसला न हारे , क्योंकि उसी चुनौती में आपकी असली ताक़त छुपी होती है।   विश्वास रखो अपने सपनों में , उन्हें अपने जीवन में बसाओ , अगर तुम उनकी प्राथमिकता बना लोगे , तो ज़िंदगी आपकी राहें सजाएगी।   जिस दिन आप खुद को प्रेम करना सीख जाएंगे , उस दिन आप दुनिया के लिए अनूठा और अद्वितीय बन जाएंगे।   हार्डवर्क और समर्पण के साथ जब मन में जलन जगाओगे , तभी आप सपनों की ऊँचाइयों पर ख़ुद को पहुंचाओगे। आपकी सामर्थ्यवान आवाज़ , आपके सपनों को पुष्टि करेगी।   जीवन ...

U.P BOARD CLASS-10 English

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Topic- Reordering of words 2014 1.cat upon the jumped table the. 2.the servant food for cooks us. 3.my taught swimming me father. 4.advised he brother him take to care his health of. 5.it a was sight fine see to. 6.five for days medicine this take regularly. click below for complete exercise. Click Here For Download

कविताएँ जो आपने कभी न पढ़ी हो ।

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ऐसी कविताएं जो आपको जीने का नया तरीका सिखलाएंगी। कविताओं को पढ़ने के लिेए नीचे दिये गये download link पर click करें। Click here for download

जब नारी है………… तभी तो है ये सृष्टि सारी

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कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी, तो कभी माँ है नारी पुरुष जिसके बिना असहाय है, ऐसी है नारी कभी ममता की फुलवारी, तो कभी राखी की क्यारी है नारी सृष्टि जिसके बिना थम जाए, ऐसी है नारी पुरुषों की पूरी भीड़ पर अकेली भारी है नारी जो सृष्टि को जलाकर राख कर दे, ऐसी चिंगारी है नारी बेटी हो तो…….. पिता की राजदुलारी है नारी माँ हो तो………. सन्तान पर हमेशा भारी है नारी बहन हो तो……. भाई की लाडली है नारी पत्नी हो तो…….. पति की जान है नारी पुरुष हमेशा अधूरा तो…….. हमेशा पूरी है नारी सृष्टि जिस पर घूम रही, वह धुरी है नार जब गर्भ में नहीं मरोगे, तभी तो तुम्हारी है नारी  जब नारी है………… तभी तो है ये सृष्टि सारी

अंगूठी की कीमत Hindi Kahani

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एक नौजवान शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला , ” गुरु जी एक बात समझ नहीं आती , आप इतने साधारण वस्त्र क्यों पहनते हैं …इन्हे देख कर लगता ही नहीं कि आप एक ज्ञानी व्यक्ति हैं जो सैकड़ों शिष्यों को शिक्षित करने का महान कार्य करता है . गुरु जी मुस्कुराये . फिर उन्होंने अपनी ऊँगली से एक अंगूठी निकाली और शिष्य को देते हुए बोले , ” मैं तुम्हारी जिज्ञासा अवश्य शांत करूँगा लेकिन पहले तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो … इस अंगूठी को लेकर बाज़ार जाओ और किसी सब्जी वाले या ऐसे ही किसी दुकानदार को इसे बेच दो … बस इतना ध्यान रहे कि इसके बदले कम से कम सोने की एक अशर्फी ज़रूर लाना .” शिष्य फ़ौरन उस अंगूठी को लेकर बाज़ार गया पर थोड़ी देर में अंगूठी वापस लेकर लौट आया . “क्या हुआ , तुम इसे लेकर क्यों लौट आये ?”, गुरु जी ने पुछा . ” गुरु जी , दरअसल , मैंने इसे सब्जी वाले , किराना वाले , और अन्य दुकानदारों को बेचने का प्रयास किया पर कोई भी इसके बदले सोने की एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ …” गुरु जी बोले , ” अच्छा कोई बात नहीं अब तुम इसे लेकर किसी जौहरी के पास जाओ और इसे बेचने की कोशिश करो …”...

सच्ची मदद

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एक नन्हा परिंदा अपने परिवार-जनों से बिछड़ कर अपने आशियाने से बहुत दूर आ गया था । उस नन्हे परिंदे को अभी उड़ान भरने अच्छे से नहीं आता था… उसने उड़ना सीखना अभी शुरू ही किया था ! उधर नन्हे परिंदे के परिवार वाले बहुत परेशान थे और उसके आने की राह देख रहे थे । इधर नन्हा परिंदा भी समझ नहीं पा रहा था कि वो अपने आशियाने तक कैसे पहुंचे? वह उड़ान भरने की काफी कोशिश कर रहा था पर बार-बार कुछ ऊपर उठ कर गिर जाता। कुछ दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ ये सब दृश्य बड़े गौर से देख रहा था । कुछ देर देखने के बाद वो दोनों परिंदे उस नन्हे परिंदे के करीब आ पहुंचे । नन्हा परिंदा उन्हें देख के पहले घबरा गया फिर उसने सोचा शायद ये उसकी मदद करें और उसे घर तक पहुंचा दें । अनजान परिंदा – क्या हुआ नन्हे परिंदे काफी परेशान हो ? नन्हा परिंदा – मैं रास्ता भटक गया हूँ और मुझे शाम होने से पहले अपने घर लौटना है । मुझे उड़ान भरना अभी अच्छे से नहीं आता । मेरे घर वाले बहुत परेशान हो रहे होंगे । आप मुझे उड़ान भरना सीखा सकते है ? मैं काफी देर से कोशिश कर रहा हूँ पर कामयाबी नहीं म...

दोस्ती की आग

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अली नाम के एक लड़के को पैसों की सख्त ज़रुरत थी . उसने अपने मालिक से मदद मांगी . मालिक पैसे देने को तैयार हो गया पर उसने एक शर्त रखी . शर्त ये थी कि अली को बिना आग जलाये कल की रात पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी पर बितानी थी , अगर वो ऐसा कर लेता तो उसे एक बड़ा इनाम मिलता और अगर नहीं कर पाता तो उसे मुफ्त में काम करना होता . अपने काम, अपने कथन और अपने मित्र के प्रति सच्चे रहिये…. अली जब दुकान से निकला तो उसे एहसास हुआ कि वाकई कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है और बर्फीली हवाएं इसे और भी मुश्किल बना रही हैं . उसे मन ही मन लगा कि शायद उसने ये शर्त कबूल कर बहुत बड़ी बेवकूफी कर दी है . घबराहट में वह तुरंत अपने दोस्त आदिल के पास पहुंचा और सारी बात बता दी . आदिल ने कुछ देर सोचा और बोला , “ चिंता मत करो , मैं तुम्हारी मदद करूँगा . कल रात , जब तुम पहाड़ी पर होगे तो ठीक सामने देखना मैं तुम्हारे लिए सामने वाली पहाड़ी पर सारी रात आग जल कर बैठूंगा . तुम आग की तरफ देखना और हमारी दोस्ती के बारे में सोचना ; वो तुम्हे गर्म रखेगी। और जब तुम रात बिता लोगे तो बाद में मेरे पास आना , मैं बदले मे...

अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी।।

ज्यों निकल कर बादलों की गोद से। थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी।। सोचने फिर फिर यही जी में लगी। आह क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।। दैव मेरे भाग्य में क्या है बढ़ा। में बचूँगी या मिलूँगी धूल में।। या जलूँगी गिर अंगारे पर किसी। चू पडूँगी या कमल के फूल में।। बह गयी उस काल एक ऐसी हवा। वह समुन्दर ओर आई अनमनी।। एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला। वह उसी में जा पड़ी मोती बनी।। लोग यों ही है झिझकते, सोचते। जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर।। किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें। बूँद लौं कुछ और ही देता है कर।।

क्यूँ ढूंढ़ता उस ख्वाब को

क्यूँ ढूंढ़ता उस ख्वाब को,के कौन जाने किधर गया, जो साथ है उसे पास रख जो गुज़र गया सो गुज़र गया, अपना समझ जिसे खुश हुआ अहसास समझ कर भूल जा, बस नशा था थोडा प्यार का सुबह हुई तो उतर गया, ...  उस शख्स का भी क्या कसूर था जो पास होकर भी दूर था, ये तो ज़माने का दस्तूर है वो भी जमाने संग बदल गया, ना रखना दिल मे यादों को आँखों को ना रोने देना, झोंका था एक हवा का,आया और छु के निकल गया....

हर खुशी है लोगों के दामन में

हर खुशी है लोगों के दामन में   , पर एक हंसी के लिए वक़्त नहीं . दिन रात दौड़ती दुनिया में   , ज़िन्दगी के लिए ही वक़्त नहीं . माँ की लोरी का एहसास तो है   , पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं . सारे रिश्तों को तो हम मार चुके  , अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं . सारे नाम मोबाइल में हैं   , पर दोस्ती के लए वक़्त नहीं . गैरों की क्या बात करें   , जब अपनों के लिए ही वक़्त नहीं . आँखों में है नींद बड़ी  , पर सोने का वक़्त नहीं . दिल है घमों से भरा हुआ   , पर रोने का भी वक़्त नहीं . पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े   , की थकने का भी वक़्त नहीं . पराये एहसासों की क्या कद्र करें   , जब अपने सपनो के लिए ही वक़्त नहीं . तू ही बता इ ज़िन्दगी   , इस ज़िन्दगी का क्या होगा   , की हर पल मरने वालों को   , जीने के लिए भी वक़्त नहीं   ………