आज का सवाल

आप सभी ने देखा होगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की क्या दशा है , पर कोई नहीं बोलता है ,
न ही उन सरकारी स्कूल के बच्चोँ को अपने जिले के डी.म. का नाम पता ,और न ही उनको अपने
पी .म. का नाम पता है ,
स्कूल का चपरासी आराम फरमाते हैं.
और बच्चे अध्यापक को पानी पीलाते हैं,
 यदि हम अपने बच्चो कों किसी प्राइवेट स्कूल में पढते  हैं और वहाँ के आध्यापक ने बच्चे को यदि गलती से काम देना भूल गया . तोह हम तुरंत उस आद्यापक से लड़ने के लिए पहुच जाते हैं .क्युकी हमारा यह तर्क होता है कि हम किस बात की इतने फीस दे रहे है . बात भी ठीक है .
पर एक बात मुझ कों समझ में नहीं आती ,एक प्राइवेट आद्यापक उस स्कूल से तनख्वाह भी कम लेता है आपेक्छ उस सरकारी स्कूल के आद्यापक के .और वो प्राइवेट होता है ,फिर भी आधिकतर लोग अपने बच्चो कों प्राइवेट स्कूल में ही भेजते है .
जबकि एक सरकारी स्कूल का आद्यापक तनख्वाह  भी बहुत जयादा लेता है ,और अपना काम भी कैसे करता है आप सभी जानते है .पर कोई कुछ नहीं बोलता ,और न कोई लड़ने जाता है उससे . जबकि वो हामारा ही पैसे लेते हैं.जो हम टेक्स जमा करते है ,क्यों नहीं बोलते हम वहाँ पर ,क्यों 

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